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वायुसेना के जवान कमल कंबोज की ड्यूटी के दौरान सड़क दुर्घटना में मौत

काम्बोज समुदाय के नेताओं ने कहा कि उन्हें गर्व है कि वायुसेना के जवान शहीद कमल काम्बोज उनके समुदाय से हैं।

नारनौंद, 11 मई – हिसार के नारनौंद उपमंडल के गांव लोहारी राघो निवासी भारतीय वायुसेना के वीर जवान कमल कंबोज का गुरुवार को पूरे वायुसेना सैन्य व पुलिस सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। बड़ी संख्या में स्थानीय निवासियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें अश्रुपूर्ण विदाई दी। वह अग्निवीर योजना के तहत भारतीय वायु सेना में काम कर रहे थे। जांबाज सिपाही कमल कंबोज लद्दाख में तैनात थे. लोहारी राघो गांव निवासी सेना के जवान कमल कंबोज की अंतिम तैनाती लद्दाख में थी, जहां से वह छुट्टी पर घर आए थे। हाल ही में उनकी तैनाती गुजरात में हुई थी। बुधवार को नारनौंद क्षेत्र के मोठ व लोहारी राघो गांव के बीच सड़क दुर्घटना में उनकी दुखद मौत हो गई। बुधवार को हांसी के सामान्य अस्पताल में उसका पोस्टमार्टम किया गया। गुरुवार सुबह उनका पार्थिव शरीर पूरे सम्मान के साथ उनके पैतृक गांव लोहारी राघो लाया गया। शवों का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस अवसर पर नायब तहसीलदार ओमवीर सिंह, नारनौंद थाना प्रभारी बलवान सिंह व सेना के जवानों ने पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। सरकार की ओर से विधायक विनोद भयाना, नायब तहसीलदार ओमवीर, चेयरमैन शमशेर कुक्कन, भाजपा नेता अजय सिंधु ने श्रद्धांजलि अर्पित की। भारतीय वायुसेना के जवान कमल का पार्थिव शरीर वायुसेना के वाहन में लाया गया जहां घर पहुंचने पर आसपास के ग्रामीणों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और फिर विशाल काफिले के साथ भारत माता की जय के नारे लगाते हुए और हाथों में तिरंगा लिए युवाओं के साथ शहीद जवान की अंतिम यात्रा में शामिल हुए। अंतिम संस्कार से पहले वायुसेना के जवानों ने उन्हें सलामी दी और उसके बाद वायुसेना के जवानों ने बंदूकों की सलामी दी। नायब तहसीलदार ओमवीर ने कहा कि हमने सेना के जवान कमल को श्रद्धांजलि दी है. नारनौद थाना प्रभारी बलवान सिंह ने बताया कि हमने यहां पहुंचकर पुलिस प्रशासन की ओर से कांस्टेबल कमल को श्रद्धांजलि दी है। उन्होंने कहा कि यह दुख की घड़ी है और हम इस दुख की घड़ी में परिवार के साथ हैं। बहादुर सिपाही कमल कंबोज दो साल पहले भर्ती हुए थे। युवक कमल के परिजनों अशोक कुमार, पंकज, राजकुमार ने बताया कि कमल बहुत ही प्रतिभाशाली युवक था। मैं दो साल पहले ही वायुसेना में शामिल हुआ हूं। जब भी मैं छुट्टियों में गांव आता तो सभी बुजुर्गों का आशीर्वाद लेता। वह बच्चों के साथ रहता था। उन्होंने बताया कि वह परिवार में इकलौते बेटे थे और उनके पिता का भी निधन हो चुका है। इसलिए परिवार में कोई कमाने वाला सदस्य नहीं है। परिवार में अब केवल उसकी माँ ही बची है। सैनिक की चाची आशा रानी, ​​मौसी विमला देवी और परमेश्वरी ने बताया कि जब कमल एक माह का था, तब उसके पिता की मौत हो गई थी। इसके बाद उनकी मां उन्हें लोहारी राघो स्थित अपने मायके ले आईं और वहीं उनका पालन-पोषण किया। गांव लोहारी राघो निवासी 24 वर्षीय कमल कांबोज 2023 से भारतीय वायुसेना में कांस्टेबल के पद पर तैनात थे। कमल की पहली पोस्टिंग लद्दाख में हुई थी। वह 28 अप्रैल को छुट्टी लेकर अपने गांव लौटे थे। पाकिस्तान के खिलाफ भारतीय सेना द्वारा शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर के मद्देनजर सैन्य कर्मियों की छुट्टियां रद्द करने का संदेश मिलने के बाद वह बुधवार को ड्यूटी पर लौट रहे थे। तभी यह दुर्घटना घटी। स्थानीय निवासियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने उनकी मां शीला देवी को सांत्वना दी। उनके पिता स्वर्गीय कश्मीरी लाल का कई वर्ष पहले निधन हो गया था। काम्बोज समुदाय के नेताओं ने कहा कि उन्हें गर्व है कि वायुसेना के जवान शहीद कमल काम्बोज उनके समुदाय से हैं।

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