
जसविंदर सिंह संधू
चंडीगढ़, 29 मई 2025 : उत्तराखंड की बर्फीली वादियों में स्थित सिख श्रद्धालुओं के सबसे पवित्र स्थलों में से एक हेमकुंड साहिब के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। 25 मई 2025 से यह तीर्थ यात्रा विधिवत शुरू हो चुकी है। लगभग 15,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह गुरुद्वारा, सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह जी को समर्पित है। ऊंचे पहाड़ों और ग्लेशियल झील के किनारे स्थित यह धाम सिर्फ आस्था का नहीं, बल्कि अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य का भी प्रतीक है।
यात्रा पर जाने से पहले जानें ये जरूरी बातें
ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य
हेमकुंड साहिब यात्रा पर जाने से पहले यात्रियों को उत्तराखंड सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन पंजीकरण कराना जरूरी है। यह प्रक्रिया बिल्कुल वैसी है जैसी चारधाम यात्रा के लिए अपनाई जाती है।
कब तक चलती है यात्रा?
हर साल यह यात्रा अप्रैल के अंत या मई की शुरुआत में शुरू होती है और अक्टूबर के मध्य तक चलती है। इस दौरान हेमकुंड में मौसम बेहद ठंडा होता है। वर्तमान तापमान 7°C और न्यूनतम 2°C तक गिर रहा है, इसलिए गर्म कपड़े साथ ले जाना आवश्यक है।
हेमकुंड साहिब कैसे पहुंचें?
सड़क मार्ग:
हेमकुंड साहिब की यात्रा का आरंभ गोविंदघाट से होता है, जो जोशीमठ के रास्ते पहुंचा जा सकता है।
हवाई मार्ग:
निकटतम एयरपोर्ट जॉली ग्रांट (देहरादून) है, जो गोविंदघाट से लगभग 276 किमी की दूरी पर है।
रेल मार्ग:
ट्रेन से आने वाले श्रद्धालु हरिद्वार या ऋषिकेश तक आ सकते हैं, वहां से सड़क मार्ग द्वारा आगे की यात्रा तय करनी होती है।
ट्रैकिंग रूट:
गोविंदघाट से 5 किमी दूर पुलना गांव तक वाहन से जाया जा सकता है, इसके बाद 15 किमी की ट्रैकिंग करनी पड़ती है।इस ट्रैक में घांघरिया एक अहम पड़ाव है, जहां यात्री विश्राम करते हैं। यही से फूलों की घाटी के लिए रास्ता जाता है।
आसपास की प्रमुख दर्शनीय स्थल
फूलों की घाटी (Valley of Flowers):
घांघरिया से 3 किमी की दूरी पर स्थित यह घाटी UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज साइट है। जुलाई और अगस्त में यहां हज़ारों प्रकार के दुर्लभ फूल खिलते हैं, जिससे पूरी घाटी रंगों से भर जाती है।
लक्ष्मण मंदिर:
हेमकुंड झील के पास स्थित यह प्राचीन मंदिर धार्मिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। मान्यता है कि भगवान लक्ष्मण ने यहां तप किया था।
यात्रा के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें:
- ट्रैकिंग के लिए मजबूत और आरामदायक जूते पहनें।
- ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी हो सकती है, इसलिए मेडिकल किट और जरूरी उपकरण साथ रखें।
- मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार यात्रा की योजना बनाएं।
- रास्ते में पानी और हल्का भोजन साथ रखें ताकि ऊर्जा बनी रहे।
- प्रशासन के दिशानिर्देशों का पालन करें।



