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भाखड़ा नहर जल विवाद: पंजाब-हरियाणा आमने-सामने, भगवंत मान ने बुलाई सर्वदलीय बैठक, मंगलवार को विशेष सत्र

जसविंदर सिंह संधू

चंडीगढ़,  2 मई 2025-पंजाब और हरियाणा के बीच भाखड़ा नहर के पानी के बंटवारे को लेकर टकराव एक बार फिर तीव्र हो गया है। पंजाब सरकार ने केंद्र पर राज्य का पानी “छीनने” और भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (BBMB) के माध्यम से हरियाणा को “अवैध रूप से” पानी दिए जाने का आरोप लगाते हुए शुक्रवार को एक सर्वदलीय बैठक बुलाई। मुख्यमंत्री भगवंत मान की अगुवाई में यह बैठक आज सुबह 10 बजे चंडीगढ़ स्थित पंजाब भवन में आयोजित की गई।

मुख्यमंत्री भगवंत मान का सख्त रुख
बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा,

“पंजाब का पानी पंजाब के लोगों का हक है। हम केंद्र या किसी अन्य राज्य के दबाव में आकर अपने किसानों और नागरिकों का हक नहीं छीनने देंगे। यह मुद्दा केवल तकनीकी नहीं, भावनात्मक और राजनीतिक भी है।”

भगवंत मान ने आरोप लगाया कि बीबीएमबी अब निष्पक्ष संस्था नहीं रही और यह केंद्र के इशारे पर काम कर रही है। उन्होंने हरियाणा को कथित रूप से नियमों के खिलाफ पानी देने को “पंजाब के साथ अन्याय” बताया।

मंगलवार को बुलाया गया विशेष सत्र
पंजाब सरकार ने आगामी मंगलवार, 6 मई 2025 को राज्य विधानसभा का एक विशेष सत्र बुलाने का फैसला किया है। इस सत्र में पानी के मुद्दे पर एक प्रस्ताव लाया जाएगा, जिसमें बीबीएमबी की भूमिका, केंद्र की नीति और हरियाणा को दिए जा रहे पानी पर चर्चा होगी।

पंजाब सरकार का कहना है कि इस प्रस्ताव के माध्यम से केंद्र पर राजनीतिक और कानूनी दबाव बनाया जाएगा ताकि पंजाब के जल अधिकारों की रक्षा हो सके।

इतिहास और पृष्ठभूमि
पंजाब और हरियाणा के बीच जल विवाद नया नहीं है। सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर को लेकर दोनों राज्यों में दशकों से तनाव है। 1981 के समझौते के तहत हरियाणा को जल देने की बात कही गई थी, जिसका पंजाब ने कड़ा विरोध किया। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के बावजूद पंजाब की विधानसभा ने कई बार इस बंटवारे को नकारा है।

अब केंद्र सरकार द्वारा बीबीएमबी के माध्यम से हरियाणा को “सीधे” पानी दिए जाने की प्रक्रिया को पंजाब में “संविधान विरोधी” और “अनैतिक” करार दिया जा रहा है।

राजनीतिक दलों की एकजुटता की कोशिश
सर्वदलीय बैठक में शामिल होकर शिरोमणि अकाली दल, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के कई नेता एक स्वर में बोले कि पानी पंजाब के अस्तित्व का सवाल है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने विपक्षी दलों से अनुरोध किया कि वे सत्र में राजनीति से ऊपर उठकर एकमत होकर पंजाब के पक्ष में प्रस्ताव का समर्थन करें।

हरियाणा की प्रतिक्रिया
दूसरी ओर, हरियाणा सरकार का कहना है कि उसे अपने हिस्से का पानी संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों के तहत चाहिए। राज्य सरकार ने यह भी संकेत दिए हैं कि वह जरूरत पड़ी तो न्यायालय का दरवाजा फिर से खटखटाएगी।

जनता की चिंता बढ़ी
इस जल विवाद के बीच सबसे ज्यादा चिंता में हैं किसान और ग्रामीण इलाकों के निवासी। मालवा, दोआबा और माझा के कई हिस्सों में जल स्तर पहले ही खतरनाक स्तर तक नीचे जा चुका है। किसानों को डर है कि अगर पानी और कम हुआ, तो खेती के साथ-साथ पीने के पानी का संकट भी गहराएगा।

निष्कर्ष:
भाखड़ा नहर जल विवाद अब केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा बन गया है। आने वाले दिनों में विधानसभा सत्र और राजनीतिक निर्णय इस मुद्दे की दिशा तय करेंगे। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या पंजाब अपने जल अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट रह पाता है या यह मामला और अधिक उलझता है।

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