
मोहाली, 25 जून : पंजाब सरकार ने धान खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी, प्रभावशाली और किसान हितैषी बनाने के लिए एक नई रणनीतिक पहल की है। मुख्यमंत्री भगवंत मान की अगुवाई में एक विशेष मंत्रिमंडलीय उपसमिति (Group of Ministers – GoM) का गठन किया गया है, जो खरीफ 2025 से पहले धान खरीद की तैयारियों और क्रियान्वयन की निगरानी करेगा। इस समिति की पहली बैठक मंगलवार को चंडीगढ़ में हुई, जिसकी अध्यक्षता राज्य के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने की। इस बैठक में खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री लाल चंद कटारूचक, परिवहन मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर और जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल भी मौजूद रहे।
“किसानों को खरीद प्रक्रिया में कोई परेशानी न हो” – मंत्री गोयल
बैठक के बाद मंत्री बरिंदर गोयल ने कहा, “धान खरीद को पूरी तरह सुव्यवस्थित करना हमारी प्राथमिकता है। हम चाहते हैं कि किसान बिना किसी अड़चन के फसल बेचें और उन्हें समय पर भुगतान मिले। यह उपसमिति उसी दिशा में एक ठोस प्रयास है।”
पंजाब: देश के अनाज भंडार की रीढ़
भारत के खाद्य उत्पादन में पंजाब की भूमिका हमेशा से अग्रणी रही है। खरीफ सीजन (जून से अक्टूबर) में धान इस क्षेत्र की मुख्य फसल है। राज्य देश के कुल चावल उत्पादन में करीब 10–12% तक योगदान देता है, जिससे यह पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के बाद शीर्ष उत्पादक राज्यों में शामिल होता है।
नई अनाज मंडियों की दिशा में भी तेजी
धान खरीद व्यवस्था के साथ-साथ सरकार इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास पर भी काम कर रही है। कुछ महीने पहले कृषि मंत्री खुड्डियां ने मोहाली के सनेटा गांव में एक नई अनाज मंडी की आधारशिला रखी थी। यह मंडी किसानों को बेहतर भंडारण सुविधाएं और व्यापारिक पारदर्शिता उपलब्ध कराएगी।
इस मौके पर मंत्री ने कहा था – “कटाई के बाद उपज का सुरक्षित भंडारण उतना ही ज़रूरी है जितना उसकी पैदावार। सरकार का मकसद है कि किसान को हर स्तर पर सहारा मिले।”
सरकार की यह रणनीति क्यों है अहम?
- किसानों को समय पर भुगतान और सुविधा मिलेगी
- खरीद प्रणाली में ई-गवर्नेंस और पारदर्शिता बढ़ेगी
- अनाज मंडियों का विस्तार स्थानीय स्तर पर व्यापार को गति देगा
- पंजाब की कृषि अर्थव्यवस्था को मिलेगा मजबूत समर्थन



