“कंप्यूटर गुरु, पर सिस्टम से ठगा महसूस कर रहे हैं”
शिक्षा विभाग के अधिकारीयों की घटिया कार्यशैली के कारण बिना वेतन राखी का त्यौहार मनाएंगे पंजाब भर के कंप्यूटर अध्यापक

बाल किशन
फिरोजपुर, 8 अगस्त : पंजाब में सरकारें बदलीं, नीतियां बदलीं, लेकिन सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहे कंप्यूटर अध्यापकों की दशा आज भी नहीं बदली। बीते 20 वर्षों से सेवा दे रहे ये अध्यापक आज भी समय पर वेतन से वंचित हैं। राखी जैसे पावन पर्व पर भी सैलरी न मिलने से उनके घरों में मायूसी छाई हुई है। जहां स्कूलों के अन्य अध्यापकों और कर्मचारियों को हर महीने की 1 या 2 तारीख को वेतन मिल जाता है, वहीं कंप्यूटर अध्यापक हर बार दूसरे या तीसरे सप्ताह तक इंतजार करने को मजबूर होते हैं। लंबे समय से यह व्यवस्था बनी हुई है, लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारी आज तक इसे सुधारने में नाकाम रहे हैं।
“क्या हम अध्यापक नहीं?”
इस संबंध में कंप्यूटर फैकल्टी एसोसिएशन पंजाब के प्रांतीय नेताओं प्रदीप कुमार मलूका, लखविंदर सिंह, जसपाल, जतिंदर सोढ़ी हरचरण सिंह और दविंदर पाठक ने बताया कि कंप्यूटर अध्यापकों की सैलरी का बिल हर महीने हेड ऑफिस मोहाली द्वारा बनाया जाता है, फिर उसे ट्रेजरी में भेजा जाता है। वहां से यह फंड जिला शिक्षा अधिकारियों को भेजा जाता है और अंत में स्कूलों के माध्यम से वेतन जारी होता है। इस पूरी प्रक्रिया में देरी के कारण हर महीने कंप्यूटर अध्यापकों को सैलरी मिलने में परेशानी होती है।
वहीं, अन्य स्टाफ की सैलरी स्कूल स्तर पर ही बनती है और लोकल ट्रेजरी द्वारा सीधे उनके खातों में ट्रांसफर कर दी जाती है। ऐसे में कंप्यूटर अध्यापक सवाल उठाते हैं — “क्या हम अध्यापक नहीं? फिर हमें अलग प्रक्रिया से क्यों गुजरना पड़ता है?”
स्कूल स्तर से मिले कंप्यूटर अध्यापकों को वेतन
उन्होंने पंजाब सरकार से अपील की है कि कंप्यूटर अध्यापकों की सैलरी भी स्कूल स्तर पर बनाकर सीधे लोकल ट्रेजरी से जारी की जाए ताकि उन्हें भी समय पर वेतन मिल सके और हर महीने यह अपमानजनक स्थिति न झेलनी पड़े। अगर अब भी शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने इस व्यवस्था में सुधार की तरफ कोई कदम ना उठाया तो वह उनके दफ्तर के समक्ष अनिश्चितकालीन तक धरना देंगे, जिसकी जिम्मेवारी संबंधित अधिकारियों और पंजाब सरकार की होगी।



