आदि धर्म समाज ने 14 अप्रैल को दुनिया भर में मुक्ति पर्व के रूप में मनाने का फैसला किया
किसी गुरु, पीर, ऋषि, मुनि या भगवान ने नहीं, बल्कि बाबा साहेब ने हमें गुलामी से मुक्ति दिलाई - दर्शन रतन रावण

फिरोजपुर, 29 मार्च (बाल किशन) – आद्य धर्म समाज (आद्य) इंडिया की एक विशेष बैठक धर्मदूत शुक्राचार्य दर्शन रतन रावण के नेतृत्व में डिप्टी कमिश्नर मीटिंग हॉल फिरोजपुर में हुई, जिसमें 14 अप्रैल 2025 को मनाए जाने वाले बाबा साहेब डॉ. भीम राव अंबेडकर के जन्मदिवस समारोह तथा वाल्मीकि समाज से जुड़े अन्य मुद्दों पर चर्चा की गई। बैठक के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए धर्मदूत शुक्राचार्य दर्शन रतन दावन ने कहा कि पंजाब को गुरुओं व पीरों की भूमि कहा जाता है तथा पूरे भारत को देवों की भूमि कहा जाता है, लेकिन किसी भी गुरु, पीर, ऋषि, मुनि या भगवान ने हमारे उद्धार का मार्ग प्रशस्त नहीं किया, जबकि ऐसा पाखंड रचा गया कि हमें शूद्र कहकर पैरों तले डाल दिया गया। बाबा साहब भीम राव अंबेडकर ने दयावान रचयिता वाल्मीकि की बातों को स्वीकार करते हुए कहा था कि, “पाखण्ड, दान, तीर्थ और तीर्थ में मत पड़ो, बल्कि ज्ञान में पड़ो।” बाबा साहब ने हमारे लिए भी यही कहा था कि अगर तुम शिक्षित होगे तो मुक्त होगे। इसलिए 14 अप्रैल को बाबा साहेब के बलिदान को ध्यान में रखते हुए, उनके जीवन के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए, जो बाबा साहेब की पत्नी रमाबाई ने भी कहा था, और मेरे 7 करोड़ बच्चों की मुक्ति के विचार को स्मरण करते हुए, हमने 14 अप्रैल को मुक्ति पर्व के रूप में मनाने का निर्णय लिया है, जो सिर्फ फिरोजपुर के लिए ही नहीं बल्कि पूरे विश्व के लिए है। अमृतसर में बाबा साहब अंबेडकर की प्रतिमा के अपमान की बात करते हुए उन्होंने कहा कि हमने पंजाब सरकार से मांग की थी कि इस घटना की जांच हाईकोर्ट के मौजूदा जज से करवाई जाए, लेकिन पंजाब की निकम्मी सरकार बाबा साहब की फोटो का इस्तेमाल तो करती है, लेकिन बाबा साहब के अपमान को दिल से नहीं लेती और इसे अपने कानून-व्यवस्था में भी नहीं लेती। यदि ऐसा होता तो इस घटना की जांच उच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश द्वारा की जाती। उन्होंने आम आदमी पार्टी को हर मुद्दे पर विफल बताया और कहा कि चाहे पटियाला का मुद्दा हो, जहां एक सेना अधिकारी की पिटाई की गई, मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर भी कोई खेद व्यक्त नहीं किया है। मुख्यमंत्री को न तो सेना की वर्दी की कीमत पता है और न ही उन्हें बाबा साहब के संविधान के बारे में पता है। बल्कि उन्होंने वोटों की खातिर बाबा साहेब अंबेडकर और भगत सिंह की फोटो लगाई है, क्योंकि उन्हें लगता है कि बाबा साहेब की फोटो लगाने से पंजाब के 40 प्रतिशत दलित वोट देंगे और अगर वे भगत सिंह की फोटो देखेंगे तो किसान वोट देंगे और हम राज करेंगे। बैठक के दौरान उन्होंने आदि धर्म समाज के प्रत्येक सिपाही को 14 अप्रैल को मुक्ति पर्व को पूरे सम्मान और अनुशासन के साथ मनाने के निर्देश दिए। इस अवसर पर अध्यक्ष शाम लाल भंगी, मुकेश मेघनाथ, रमेश अटवाल, मुख दानव, दर्शन मंड, कमल द्रविड़, रवि खांडियां, अजय चंडालिया, डा. राकेश, विक्रम चंडालिया, सरपंच बूटा, सरपंच जिंदर, एमसी जस्सा, जसवीर सभरवाल आदि उपस्थित थे।



