
जसविंदर सिंह संधू
चंडीगढ़, 2 जुलाई : पंजाब की राजनीति में पिछले कुछ हफ्तों से एक ही सवाल तैर रहा था—क्या भाजपा और शिरोमणि अकाली दल (SAD) फिर से साथ आएंगे? लेकिन सोमवार को भाजपा ने इस अटकल पर फुल स्टॉप लगा दिया। पार्टी ने साफ शब्दों में कहा कि SAD के साथ 2027 विधानसभा चुनाव में कोई गठबंधन नहीं होगा। पार्टी नेतृत्व ने पंजाब के पदाधिकारियों को हिदायत दी है कि वे इस मुद्दे पर कोई सार्वजनिक बयान न दें।
‘अफवाहें बंद करें, संगठन पर फोकस करें’: रैना ने दिया संदेश
पार्टी के पंजाब और जम्मू-कश्मीर के सह प्रभारी नरिंदर सिंह रैना ने चंडीगढ़ के सेक्टर-31 में पार्टी मुख्यालय पर हुई बैठक में यह निर्देश दिए। उन्होंने कहा, ‘‘पिछले कुछ दिनों में SAD के साथ गठबंधन की अटकलें तेज हो गई हैं, लेकिन यह पूरी तरह बेबुनियाद हैं। मैंने खुद शीर्ष नेतृत्व से बात की है, और वहां से भी यह साफ कहा गया है कि **अभी कोई बातचीत नहीं हो रही है।’’
बिक्रम मजीठिया का बचाव न करें, पार्टी की छवि न खराब हो
रैना ने नेताओं से यह भी अपील की कि SAD नेता बिक्रम मजीठिया का कोई सार्वजनिक बचाव न करें। मजीठिया फिलहाल ड्रग्स और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े केस में जांच का सामना कर रहे हैं। रैना बोले, ‘‘चाहे आरोप राजनीति से प्रेरित हों या नहीं, पर हम ऐसा कोई संकेत न दें कि भाजपा ऐसे नेताओं के साथ खड़ी है।’’
नड्डा ने भी रुख किया साफ
बैठक में पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा का संदेश भी साझा किया गया। उन्होंने दोहराया कि SAD से गठबंधन की कोई योजना नहीं है और इस बारे में कोई बयानबाज़ी नहीं होनी चाहिए। यह निर्देश पंजाब भाजपा में हाल ही में उठी SAD के साथ फिर से जुड़ने की मांगों के बाद आया है।
सुनील जाखड़ जैसे नेता SAD से नजदीकी के पक्ष में
पार्टी के कुछ नेता जैसे सुनील जाखड़ ने बीते दिनों SAD से मिलकर चुनाव लड़ने की वकालत की थी। इसके अलावा कुछ नेताओं ने मजीठिया की गिरफ्तारी को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया था। लेकिन अब पार्टी हाईकमान ने साफ कर दिया है कि ऐसी किसी भी लाइन पर आगे नहीं बढ़ा जाएगा।



