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मुंबई पुलिस की बड़ी सफलता : फर्जी पासपोर्ट से नॉर्वे भागने की कोशिश करते बांग्लादेशी नागरिक गिरफ्तार

मुंबई, 3 जून 2025 : मुंबई पुलिस ने एयरपोर्ट पर एक बड़ी कार्रवाई करते हुए दो बांग्लादेशी नागरिकों को फर्जी भारतीय पासपोर्ट के साथ गिरफ्तार किया है। आरोपी पति-पत्नी नॉर्वे जाने की फिराक में थे और जेद्दा के रास्ते भागने की कोशिश कर रहे थे। गिरफ्तारी 1 जून को मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन जांच के दौरान हुई।

कौन हैं आरोपी?

गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान सुब्रतो मंडल और मीता गौरपद बिस्वास के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, दोनों बांग्लादेश के खुलना और गोपालगंज जिलों के निवासी हैं। वे छह साल पहले पश्चिम बंगाल के रास्ते भारत में अवैध रूप से दाखिल हुए थे और कोलकाता में रह रहे थे।

कैसे बनाए गए फर्जी दस्तावेज?

भारत में रहने के दौरान इन दोनों ने नबोनिता नाम की एक एजेंट की मदद से फर्जी दस्तावेज तैयार कराए थे। इन दस्तावेजों के जरिए उन्होंने 2024 में अपने लिए और अपने बच्चे के लिए भारतीय पासपोर्ट बनवा लिया। उनका बच्चा 2023 में कोलकाता में पैदा हुआ था, जिसे वे भारतीय नागरिक के तौर पर दिखा रहे थे ताकि पासपोर्ट बनवाने में कोई परेशानी न आए।

नॉर्वे की उड़ान से पहले हुई गिरफ्तारी

1 जून को दोपहर करीब 12:30 बजे दंपत्ति अपने बच्चों के साथ मुंबई एयरपोर्ट पहुंचे। उन्हें दोपहर 2:30 बजे जेद्दा होते हुए नॉर्वे के लिए उड़ान पकड़नी थी। इमिग्रेशन अधिकारी उमेश दत्तात्रेय निंबालकर को पासपोर्ट की जांच के दौरान दस्तावेजों पर संदेह हुआ। जब आगे पूछताछ की गई, तो दोनों ने स्वीकार कर लिया कि वे भारतीय नहीं बल्कि बांग्लादेशी नागरिक हैं।

रिश्तेदारों से बातचीत में खुली पोल

पूछताछ के दौरान आरोपियों ने अपने रिश्तेदारों का संपर्क नंबर अधिकारियों को दिया। इसके बाद जब बांग्लादेश में मौजूद उनके रिश्तेदारों से संपर्क किया गया, तो उन्होंने दोनों की असली पहचान की पुष्टि कर दी। पुष्टि होने के बाद इमिग्रेशन अधिकारियों ने दोनों को तुरंत सहार पुलिस के हवाले कर दिया।

मुंबई पुलिस ने दर्ज किया केस

मुंबई पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय पासपोर्ट अधिनियम, विदेशी नागरिक अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। अब पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस पूरे फर्जीवाड़े के पीछे कोई बड़ा मानव तस्करी या नकली दस्तावेजों का रैकेट सक्रिय है।

क्या है खतरा?

यह मामला न केवल भारत की सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक गंभीर चेतावनी है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे अवैध रूप से भारत में दाखिल हुए विदेशी नागरिक फर्जी पहचान के बल पर अंतरराष्ट्रीय यात्रा की कोशिश कर सकते हैं। समय रहते हुई इस कार्रवाई से एक संभावित अंतरराष्ट्रीय खतरा टाल दिया गया है।

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