
बाल किशन
फिरोजपुर, 10 जून 2025 : सेंट्रल जेल फिरोजपुर में जेल प्रशासन ने एक बार फिर सख्त कार्रवाई करते हुए 13 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। ये बरामदगी दो अलग-अलग तलाशी अभियानों में की गई। मामले में 19 विचाराधीन कैदियों को नामजद करते हुए प्रिज़न एक्ट की धारा 52-A के तहत केस दर्ज किया गया है। इस कार्रवाई का उद्देश्य जेल के अंदर से चल रहे अवैध संचार और संभावित आपराधिक गतिविधियों पर रोक लगाना है। बरामद मोबाइल फोन के जरिए कैदी न सिर्फ अपने परिवार और दोस्तों से संपर्क में थे, बल्कि कई मामलों में आपराधिक नेटवर्क से भी जुड़े होने की आशंका जताई गई है।
ये हैं नामजद कैदी
कार्रवाई के बाद जिन 19 कैदियों को नामजद किया गया है, उनमें शामिल हैं : आकाशवीर सिंह उर्फ गगन, लखविंदर सिंह, रोहित कुमार, गुरजंत सिंह, मंजीत सिंह, अमनदीप कुमार उर्फ सकोड़ा, सतनाम सिंह उर्फ सत्तू, सुखविंदर सिंह उर्फ काला, सतनामजीत सिंह, रणजीत सिंह उर्फ राणा, कुलदीप कुमार उर्फ कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह, जापान सिंह, सुरिंदर सिंह उर्फ काली, संदीप सिंह उर्फ सीपा, गुरिंदर सिंह और करण उर्फ निज्जा। शिकायत जेल के असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट की ओर से सिटी पुलिस स्टेशन में दर्ज करवाई गई।
सवालों के घेरे में जेल की सुरक्षा व्यवस्था
बार-बार मोबाइल और अन्य प्रतिबंधित सामान की बरामदगी ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि कई बार जेल स्टाफ, खासकर अस्पताल विंग में तैनात कर्मियों की भूमिका पर भी शक जताया गया है।
प्रशासन ने माना कि मोबाइल जैसी चीज़ों की जेल में एंट्री भीतर-बाहर फैले नेटवर्क के कारण संभव हो रही है। ऐसी घटनाएं बताती हैं कि सिर्फ मैनुअल तलाशी से काम नहीं चलेगा, बल्कि तकनीकी समाधानों की जरूरत है।
एक साल में 288 मोबाइल फोन बरामद
2025 में अभी तक जनवरी से मई तक 269 मोबाइल फोन और जून महीने में अब तक 19 फोन बरामद हो चुके हैं। वहीं, 2024 में कुल 510 मोबाइल फोन जेलों से बरामद किए गए थे।
क्या कहती हैं सुरक्षा एजेंसियां?
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, जेलों में मोबाइल फोन की एंट्री को रोकने के लिए इंटरनेट ब्लॉकर, जैमर, और निगरानी तकनीक की जरूरत है। इसके साथ ही पैरोल और विजिटर्स की सख्त जांच भी अनिवार्य है, खासकर उन कैदियों के मामले में जो पहले मोबाइल या अन्य प्रतिबंधित चीज़ों के साथ पकड़े जा चुके हैं।



