Punjab

पानी के मुद्दे पर हरियाणा, पंजाब और केंद्र सरकार के बीच जारी है नूरा कुश्ती: कुमारी सैलजा

हरियाणा की भाजपा सरकार अपने हितों की रक्षा करने में पूरी तरह से रही है नाकाम

जसविंदर सिंह संधू

चंडीगढ़, 15 मई-अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा ने कहा है कि प्रदेश की भाजपा सरकार हरियाणा के हितों की रक्षा करने में नाकाम रही है, ऐसा लग रहा है कि केंद्रीय सरकार, नायब सैनी सरकार और पंजाब की भगवंत मान सरकार के बीच में नूराकुश्ती जारी है। पानी के मुुद्दे को लेकर हरियाणा को कोर्ट में जाने के बजाए केंद्र पर ही दवाब बनाना चाहिए क्योंकि देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट का आदेश पंजाब सरकार नहीं मान रही है। मीडिया को जारी बयान में कुमारी सैलजा ने समझौते के अनुसार हरियाणा को पानी न देने की जिद पर पंजाब अड़ा हुआ है। 15 मार्च से पंजाब सरकार ने हरियाणा का पानी बंद कर रखा है, भीषण गर्मी में जहां प्रदेश के जलघर की डिग्गियां सूखी पड़ी है, लोगों की प्यास बुझाने के लिए हरियाणा ने अपने हक का पानी मांगा था पर पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पानी पर राजनीति कर रही है। कुमारी सैलजा ने कहा कि हरियाणा सरकार को यह मुद्दा कोर्ट में नहीं ले जाना चाहिए था, क्योंकि पंजाब सरकार एसवाईएल नहर मामले में देश की सबसे बड़ी अदालत सर्वोच्च न्यायालय का आदेश तक नहीं मान रही है। पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट इस मामले में अब 20 मई को सुनवाई करेगा, उधर  21 मई से नए शेड्यूल से हरियाणा को पानी मिलना पहले से ही था या तो 21 मई से तो पानी मिल ही जाएगा। भाखड़ा नांगल डैम में पानी की कोई कमी नहीं है बल्कि फिलहाल कई फुट बढ़ गया है क्योंकि पहाड़ों पर बारिश भी हुई है और बर्फ भी पिघल रही है।सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि फिर दो महीने से हरियाणा सरकार जनता को क्यों गुमराह  करने में लगी है। दो माह में न डैम का कंट्रोल मिला है, न डैम पर केंद्रीय पैरामिलिट्री फोर्स लगी है, न पंजाब पुलिस डैम से हटी है, न हरियाणा को 8500 क्यूसिक पानी मिला है, न बीबीएमबी में हरियाणा का मेंबर लगा है, न भगवंत मान सरकार पर कोई कार्रवाई हुई है, न मोदी सरकार ने आर्टिकल 257 के तहत पंजाब को पानी छोडने का आदेश जारी किया है।  इससे तो साफ लग रहा है कि नायब सैनी सरकार व केंद्रीय भाजपा सरकार ने हरियाणा के हितों से विश्वासघात किया, हरियाणा सरकार प्रदेश के हितों की रक्षा करने में नाकाम रही है।

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