
अमृतसर, 7 जून 2025 : पंजाब में हथियार तस्करी के एक संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। अमृतसर बॉर्डर रेंज में की गई गोपनीय छापेमारी के दौरान ANTF ने 6 अत्याधुनिक विदेशी हथियार बरामद करते हुए जुगराज सिंह के तीन साथियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई राज्य में अवैध हथियार तस्करी पर नकेल कसने की दिशा में एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।
कैसे हुआ खुलासा? गोइंदवाल जेल से चल रहा था पूरा ऑपरेशन
प्रारंभिक जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इस पूरे रैकेट का सरगना जुगराज सिंह, जो इस समय गोइंदवाल जेल में बंद है, वहीं से नेटवर्क को संचालित कर रहा था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, वह अपने वकील के मुंशी के जरिए जेल से निर्देश भेजता था और बाहर मौजूद नेटवर्क के जरिए सीमा पार से हथियार मंगवाकर पंजाब में सप्लाई करता था।
दर्ज हुआ मामला, जांच तेज
ANTF ने इस मामले में शस्त्र अधिनियम के तहत FIR ANTF पुलिस स्टेशन, एसएएस नगर में दर्ज कर ली है। अब पुलिस इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों, संभावित अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शनों की भी गहराई से जांच कर रही है। सूत्रों के अनुसार, इस रैकेट की जड़ें पाकिस्तान से आने वाले हथियारों की सप्लाई चेन से भी जुड़ी हो सकती हैं।
पंजाब पुलिस का बयान
पंजाब पुलिस ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए कहा, “हम राज्य में अवैध हथियार तस्करी को जड़ से खत्म करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। पंजाब की शांति और सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता है।”
बरामद हथियारों की खासियत
ANTF की कार्रवाई में जो हथियार बरामद किए गए हैं, वे पूरी तरह से विदेशी तकनीक से निर्मित हैं और सीमा पार से तस्करी कर पंजाब में लाए गए थे। इनमें उच्च क्षमता वाली पिस्तौलें और ऑटोमैटिक हथियार शामिल हैं, जो गंभीर आपराधिक वारदातों के लिए इस्तेमाल किए जा सकते थे। चौंकाने वाली बात यह है कि कई हथियारों के सीरियल नंबर जानबूझकर मिटा दिए गए थे, ताकि उनकी पहचान न हो सके और उन्हें ब्लैक मार्केट में आसानी से सप्लाई किया जा सके।
आगे क्या होगा?
इस पूरे मामले में अब पुलिस की अगली रणनीति पर सबकी नजर है। सबसे पहले, गोइंदवाल जेल में बंद मास्टरमाइंड जुगराज सिंह से विशेष पूछताछ की जाएगी ताकि पूरे नेटवर्क की परतें खोली जा सकें। इसके साथ ही, उसके वकील और मुंशी की भूमिका की भी गहराई से जांच की जा रही है, जो जेल और बाहर के नेटवर्क के बीच की कड़ी हो सकते हैं। पुलिस अब स्मगलिंग के रूट, हथियारों के संभावित फाइनेंसरों और ड्रोन के जरिए हथियार सप्लाई की आशंका की भी जांच कर रही है, जिससे रैकेट का पूरा दायरा सामने लाया जा सके।



