Punjab

चंडीगढ़ में पहली बार दुष्कर्म-हत्या मामले में फांसी की सजा: 8 साल की मासूम से दरिंदगी करने वाले को सख्त सजा

दोषी हीरा लाल उर्फ गुड्डू को कोर्ट ने दिया मौत का फरमान, पाक्सो और हत्या की धाराओं में दोषी करार

जसविंदर सिंह संधू

चंडीगढ़, 3 जून 2025: चंडीगढ़ में न्याय प्रणाली ने एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए 8 साल की बच्ची से दुष्कर्म और निर्मम हत्या करने वाले आरोपी को फांसी की सजा सुनाई है। यह पहला मौका है जब चंडीगढ़ की किसी अदालत ने किसी दुष्कर्म और हत्या के मामले में दोषी को मृत्यु दंड दिया है। दोषी की पहचान हीरा लाल उर्फ गुड्डू के रूप में हुई है, जो बच्ची का पड़ोसी था और घटना के समय उसी इलाके में रह रहा था। अदालत ने इस जघन्य अपराध को “दुर्लभतम मामलों में से एक” करार देते हुए कड़ा रुख अपनाया और कहा कि ऐसी घटनाएं समाज को झकझोर देती हैं और बच्चियों की सुरक्षा पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करती हैं।

घटना का पूरा विवरण:
यह वीभत्स मामला पिछले वर्ष 2024 का है, जब आठ साल की मासूम बच्ची अचानक अपने घर के पास से लापता हो गई थी। काफी तलाश के बाद उसका शव पास के एक सुनसान इलाके से बरामद हुआ। प्रारंभिक जांच में बच्ची के साथ दुष्कर्म और फिर गला घोंटकर हत्या किए जाने की पुष्टि हुई थी। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल और अन्य तकनीकी सबूतों के आधार पर हीरा लाल उर्फ गुड्डू को गिरफ्तार किया था। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी नशे का आदी है और पहले भी आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहा है।

तेजी से चली सुनवाई, पॉक्सो और आएपीसी की धाराएं लागू
इस मामले में पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या), 376 (दुष्कर्म) और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था। अदालत में मुकदमा तेजी से चला और महज एक साल के अंदर मामले का निपटारा कर दिया गया। विशेष लोक अभियोजक (स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर) ने कोर्ट में आरोपी की मानसिक विकृति और घटना की क्रूरता को उजागर करते हुए सख्त सजा की मांग की। जज ने भी माना कि आरोपी ने बच्ची के साथ जिस क्रूरता से व्यवहार किया, वह समाज में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा करता है।

अदालत की टिप्पणी:
अदालत ने कहा –”यह कांड किसी भी सभ्य समाज के लिए शर्मनाक है। छोटी बच्ची के साथ दुष्कर्म और फिर उसकी निर्मम हत्या ने मानवता को शर्मसार किया है। ऐसे मामलों में नरमी दिखाना न्याय नहीं, अन्याय होगा।”

पुलिस की सक्रियता से हुआ न्याय संभव
इस केस में चंडीगढ़ पुलिस की तत्परता और पेशेवर जांच की सराहना हो रही है। सीमित समय में चार्जशीट दाखिल कर अदालत में मजबूत पैरवी की गई, जिसके चलते आरोपी को दोषी करार दिया जा सका।

संदेश समाज के लिए:
यह फैसला चंडीगढ़ के इतिहास में एक मिसाल बन गया है। अदालत का यह कड़ा फैसला उन अपराधियों के लिए सख्त संदेश है जो मासूम बच्चियों को अपनी दरिंदगी का शिकार बनाते हैं। परिजनों ने फैसले पर संतोष जताते हुए कहा कि न्याय मिल गया, लेकिन उनकी बच्ची उन्हें कभी वापस नहीं मिलेगी।

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