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अबूधाबी में बुजुर्ग सिख के साथ धार्मिक अपमान, पगड़ी और किरपाण उतरवाकर 20 दिन हिरासत में रखा गया

कैथल, 4 जून – हरियाणा के कैथल जिले के रहने वाले 62 वर्षीय अमृतधारी सिख दलविंदर सिंह के साथ अबूधाबी में कथित रूप से धार्मिक आधार पर दुर्व्यवहार किया गया। उनके बेटे मनप्रीत सिंह ने भारत सरकार को लिखित शिकायत भेजकर बताया है कि उनके पिता को जबरन पगड़ी और धार्मिक प्रतीक किरपाण उतारने के लिए मजबूर किया गया और उन्हें करीब 20 दिनों तक हिरासत में रखकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।

समूह यात्रा के दौरान हुई घटना
जानकारी के मुताबिक, दलविंदर सिंह 21 अप्रैल 2025 को पर्यटक वीजा पर एक धार्मिक समूह के साथ अबूधाबी गए थे। यह यात्रा एक धार्मिक संस्था द्वारा आयोजित की गई थी, जिसमें समूह बोचासन-पुरुषोत्तम वासी अक्षर (BAPS) मंदिर भी गया। इसी दौरान सुरक्षा अधिकारियों की नजर उनके सिर पर बंधी पगड़ी और उनके पास मौजूद धार्मिक कृपाण पर गई।

धार्मिक प्रतीकों को लेकर आपत्ति
मनप्रीत सिंह ने बताया कि दलविंदर सिंह ने अधिकारियों को समझाने की कोशिश की कि वह अमृतधारी सिख हैं और किरपाण उनके धार्मिक विश्वास का अभिन्न हिस्सा है, जिसे भारतीय संविधान और अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता अधिकारों के तहत मान्यता प्राप्त है। इसके बावजूद उन्हें जबरन पगड़ी और किरपाण उतारने को कहा गया, और विरोध करने पर उन्हें हिरासत में ले लिया गया।

हिरासत में अपमान और बदसलूकी
परिजनों के अनुसार, 20 दिनों तक अबूधाबी में हिरासत में रहने के दौरान दलविंदर सिंह को बार-बार अपमानित किया गया और धार्मिक विश्वासों का मज़ाक उड़ाया गया। उन्हें एक कमरे में बंद रखा गया, मानसिक दबाव डाला गया और परिजनों से मिलने या कानूनी सहायता प्राप्त करने की अनुमति नहीं दी गई।

भारत सरकार से कार्रवाई की मांग
मनप्रीत सिंह ने विदेश मंत्रालय और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से इस घटना की जांच की मांग की है। उन्होंने कहा, “यह न सिर्फ मेरे पिता के धार्मिक विश्वासों का उल्लंघन है, बल्कि भारत के करोड़ों सिखों की गरिमा के खिलाफ है। हम भारत सरकार से मांग करते हैं कि वह इस मामले को कूटनीतिक स्तर पर उठाए और अबूधाबी सरकार से जवाब मांगे।”

सिख संगठनों की प्रतिक्रिया
घटना पर कई सिख संगठनों ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से हस्तक्षेप की मांग की है और इसे सिखों की धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला बताया है। यह घटना अंतरराष्ट्रीय मंच पर धार्मिक अधिकारों की बहस को फिर से हवा देती है, खासकर जब धार्मिक प्रतीकों को सुरक्षा के नाम पर निशाना बनाया जाता है। सिख समुदाय ने अब एकजुट होकर न्याय की मांग उठाई है और उम्मीद की जा रही है कि भारत सरकार इस पर सख्त कार्रवाई करेगी।

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